मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

एक सच

 
मैं
अब प्यार के मौन पर,
नहीं करती यक़ीं,
सुनना,
बोलना,
समझना,
क्योंकि......
वक़्त नहीं,
वर्षों ,
इन्तज़ार के बाद,
तुम,
सजीव,
फिर कैसे,
मैं सहूँ,
तुम्हारी
चुप्पी !!!!

............निवेदिता 

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