तुम मुझे ख़ुशी नहीं ,
गम ही दे देना ,
ज्यादा नहीं अपनी श्रद्धा,
कम ही दे देना,
पर साथ चलना मेरे उन ,
उबड़ खाबड़ रास्तो पर,
तन से ना सही,
मन से ही ,
मैं जब अँधेरे में डरने लगु,
तो विश्वास दिलाना ,
रौशनी आयेगी ,
जब गम के बादल
घिर आये,
तो यकीन दिलाना ,
सूरज फिर से निकलेगा
खुशियाँ फिर से,
जिन्दगी मे आयेगी।
बस
इतना ही चाहिए
मुझे तुम्हारी दोस्ती से
अपराजिता
गम ही दे देना ,
ज्यादा नहीं अपनी श्रद्धा,
कम ही दे देना,
पर साथ चलना मेरे उन ,
उबड़ खाबड़ रास्तो पर,
तन से ना सही,
मन से ही ,
मैं जब अँधेरे में डरने लगु,
तो विश्वास दिलाना ,
रौशनी आयेगी ,
जब गम के बादल
घिर आये,
तो यकीन दिलाना ,
सूरज फिर से निकलेगा
खुशियाँ फिर से,
जिन्दगी मे आयेगी।
बस
इतना ही चाहिए
मुझे तुम्हारी दोस्ती से
अपराजिता
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