गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

बेटी


आँखे बंद थी ,
गहरी नींद ,
न सुगबुगाहट ,
अचानक,
स्वप्न शरू था ...
गुलाबी फॉर्क, 
सफ़ेद थी जूही की कली,
फुदक फुदक ,
कौन हो ,
परी हो ,
या देवपुत्री ,
ढेरो खिलौने इर्द गिर्द ,
माटी से खेलती ,
साथ में बच्चे छोटे छोटे ,
सखा सहेली ,
पैरो में पायल ,
कौन हो ?
भाग खड़ी हुई । 
गुनगुनाते लोरी सी आवाज़ ,
अचानक मुड़ती है .
ठिठकती है ,
माँ, कैसे रूकू ?
मै तो वही हूँ ,
गुड़िया ,
कल ही कोख से भगाया आपने.......।

……निवेदिता

 

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